जीवन परिचय biography in Hindi

कल्याण सिंह जीवनी और बाबरी मस्जिद विवाद | Kalyan Singh Biography In Hindi & Babri Masjid Vivad

Kalyan Singh Biography, Family, Caste, Age, In Hindi: इस पोस्ट में हम उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जीवन परिचय और बाबरी मस्जिद विध्वंस में उनका योगदान के बारे में चर्चा करेंगे।

कल्याण सिंह एक भारतीय जनता पार्टी के नेता थे, जो बाद में उत्तर प्रदेश के 2 बार मुख्यमंत्री और राजस्थान, हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे। इन्ही के शासनकाल में विवादित ढांचा बाबरी मस्जिद का विध्वंस किया गया। इन्होंने पार्टी को छोड़ा लेकिन वापिस विचारधारा के मेल ना खाने से भाजपा में आ गए।

कल्याण सिंह जीवनी और बाबरी मस्जिद विवाद

कल्याण सिंह जीवन परिचय | Kalyan Singh Biography In Hindi

नाम (Name)कल्याण सिंह (Kalyan Singh)
राजस्थान के राज्यपाल4 सितम्बर 2014 से 8 सितम्बर 2019 तक
हिमाचल प्रदेश के राज्यपालजनवरी 2015 से 12 अगस्त 2015 तक
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री24 जून 1991 से 6 दिसम्बर 1992 तक (पहला कार्यकाल),
21 सितम्बर 1997 से 12 नवम्बर 1999 (दूसरा कार्यकाल)
सांसद, लोकसभा2009 से 2014 तक
जन्म तिथि और स्थान (Date of birth & place)5 जनवरी 1932 अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
मृत्यु की तिथि और स्थान (Date of death & place)21 अगस्त 2021 (उम्र 89) लखनऊ, उत्तर प्रदेश
पत्नी का नाम (wife Name)रामवती
माता पिता का नाम (parents name)श्रीमती सीता देवी (माता),
श्री तेजपाल लोधी राजपूत (पिता)
जाती और धर्म (Caste & religion)राजपूत, हिंदू

कल्याण सिंह का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल

कल्याण सिंह का जन्म 6 जनवरी 1932 को अलीगढ़ उत्तर प्रदेश में हुआ। इनके माता पिता का नाम पिताजी तेजपाल लोधी राजपूत और माता जी श्रीमती सीता देवी था। कल्याण सिंह स्कूल से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सदस्य बन गए थे।

कल्याण सिंह का राजनीतिक जीवन

कल्याण सिंह के राजनीतिक जीवन की शुरुआत अतरौली विधानसभा क्षेत्र साल 1967 से होती है जब उन्होंने पार्टी भारतीय जनसंघ के साथ चुनाव लडा था।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के रूप में पहला कार्यकाल

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साल 1990 जब कल्याण सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और नेताओं ने राम जन्म भूमि के लिए राम रथ यात्रा का आयोजन किया। उसके बाद साल 1991 में कल्याण सिंह जी पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल

दूसरा मौका आया बाबरी विध्वंस के बाद जब 1993 में फिरसे चुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी ने 177। सीटें जीती लेकिन समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनो ने मिलकर मायावती को मुख्यमंत्री बनाया।

भाजपा पार्टी को छोड़ना और वापस आना

साल 1999 महीना दिसंबर में भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता कल्याण सिंह ने बीजेपी पार्टी छोड़ दी। और जनवरी 2004 में वो और पार्टियों से विचारधारा का मेल ना खाने से वापस भाजपा में आ गए। लेकिन उसके बाद कल्याण सिंह को वो पहले वाला दर्जा कभी प्राप्त ना हो सका।

20 जनवरी 2009 को कल्याण सिंह ने एक बार फिर पार्टी छोड़ दी लेकिन साल 2014 में वे एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी ने आ गए।

इसी बीच कल्याण सिंह ने जन क्रांति पार्टी की स्थापन की लेकिन भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने उसका विलय भी बीजेपी में कर दिया।

राजस्थान के राजपाल

4 सितम्बर 2014 से लेकर 8 सितम्बर 2019 तक कल्याण सिंह को राजस्थान का राज्यपाल बनने का मौका मिला।

हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल

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जनवरी 2015 से लेकर 12 अगस्त 2015 तक कल्याण सिंह हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे।

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कल्याण सिंह की मौत

3 जुलाई 2021 को कल्याण सिंह जी को सांस लेने में तकलीफ हुई और उन्हें डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया। जहां डॉक्टरों ने अपने भरसक प्रयास किए लेकिन बाद ने उन्हें संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया। उसने मिलने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जेपी नड्डा उनसे मिलने गए और 21 अगस्त 2021 को 89 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

कल्याण सिंह और बाबरी मस्जिद विवाद का नाता

बाबरी मस्जिद विध्वंस की फोटो 1992

सरकार द्वारा 2.77 एकड़ भूमि अधिग्रहण

साल 1991 में कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री बनते ही अयोध्या में बाबरी मस्जिद के पास ही 2.77 एकड़ भूमि का अधिग्रहण उत्तर प्रदेश सरकार ने किया। यह भूमि सरकार ने पर्यटकों के निर्माण के लिए प्रत्यक्ष रूप से खरीदी थी।

लेकिन बाद ने कल्याण सिंह ने उस जमीन पर हिंदुओ को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति दे दी। धीरे धीरे कई पुजारी अयोध्या में राम मंदिर के पक्ष में आंदोलन करने लगा गए।

6 दिसंबर 1992 को RSS और उनके सहयोगियों ने मिलकर अयोध्या में राम जन्म भूमि की जगह कारसेवा का आयोजन किया। जिसमे 150000 कारसेवकों का शामिल होना तय था।

इस कारसेवा के दौरान भाजपा के नेता मुरली मनोहर जोशी और ऊमा भारती के साथ लाल कृष्ण आडवाणी जैसे दिग्गज नेता शामिल थे। लेकिन हाथ से बाहर होकर भीड़ से हिंदू संगठनों ने पुलिस बैरियर तोड़कर मस्जिद पर हमला कर दिया।

कल्याण सिंह ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को वादा किया था को बाबरी मस्जिद को कुछ नही होगा। और बाबरी विध्वंस के कुछ ही घंटो बाद कल्याण सिंह ने अपने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। केंद्र सरकार ने देरी न करते हुए यूपी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया।

कहा जाता है की जबतक कल्याण सिंह की सरकार थी तब तक दंगे रुके रहे लेकिन केंद्र ने जैसे ही सरकार को बर्खास्त किया यूपी में दंगे होना शुरू हो गए।

भारतीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना का आरोप

कल्याण सिंह जी ने भारतीय सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया था की बाबरी मस्जिद को कुछ नही होगा। लेकिन उसके ढह जाने के बाद इनपर न्यायालय की अवमानना का केस भी चला। और उन्हे एक दिन की जेल के साथ ₹20,000 का जुर्माना भी लगा।

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